पहलगाम: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए आदिल शाह के परिवार को नया घर सौंपकर अपना वादा पूरा कर दिया है। यह मकान आदिल के पैतृक गांव हापटनार में बनाया गया है। बता दें कि आदिल शाह पर्यटकों को खच्चर पर सवारी कराते थे। 22 अप्रैल 2025 को बैसरन घाटी में आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में उनकी मौत हो गई थी। इस हमले में 25 अन्य पर्यटकों की भी जान चली गई थी। शाह के परिवार को सौंपे गए इस नए घर को शिंदे के राजनीतिक गुरु आनंद दीघे के नाम पर आनंदनाथ भवन नाम दिया गया है।
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मदद पाकर भावुक हो गए आदिल शाह के पिता
पहलगाम हमले की पहली बरसी से एक दिन पहले शिवसेना ने हापटनार में एक कार्यक्रम आयोजित किया। एकनाथ शिंदे ने इस कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया, जबकि महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट और योगेश रामदास कदम मौके पर मौजूद रहे और परिवार को घर सौंपा। आदिल के पिता सैयद हैदर शाह ने भावुक होते हुए कहा, 'हम शिंदे जी के बहुत आभारी हैं। घटना के बाद उन्होंने आर्थिक सहायता के लिए अपने सहायकों को हमारे घर भेजा और घर बनवाने का वादा किया। उन्होंने घर बनवाकर हमें दे दिया है, साथ ही आर्थिक सहायता भी प्रदान की है।'
'जाने वाले की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती'
शाह के पिता ने आगे कहा, 'उन्होंने हमें श्रीनगर में बैठक के लिए बुलाया था और उनकी टीम अभी भी हमसे संपर्क में है। उनके एक सहायक ने हमसे कहा, हम आपके बेटे जैसे हैं। मैं भी आपका आदिल हूं। इससे हमें हिम्मत मिली है।' परिवार को जम्मू-कश्मीर सरकार से भी मदद मिली है। आदिल की पत्नी को नौकरी दी गई है और छोटे भाई को भी रोजगार मिला है, साथ ही आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है। सैयद हैदर शाह ने अपने बेटे को याद करते हुए कहा, 'चाहे कुछ भी दे दिया जाए, जाने वाले की कमी पूरी नहीं हो सकती। मन को शांति नहीं मिलती।'
'उसने दूसरों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी'
शाह ने आदिल के बलिदान को मानवता का सबसे बड़ा उदाहरण बताते हुए कहा, 'उसे अपनी जान की परवाह नहीं थी। उसने दूसरों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी। उसने हिंदू, मुसलमान या सिख का भेद नहीं किया। उसने दिखाया कि मानवता सर्वोपरि है, सबकी रगों में एक ही खून बहता है। सारी जिम्मेदारियां उसी पर थीं। माता-पिता, भाइयों, सबकी देखभाल करना, लेकिन यह अल्लाह की मर्जी थी। हम आदिल को हर पल याद करते हैं। घर में उसकी तस्वीरें देखकर हमें उसकी याद और भी ज़्यादा आती है।'
'शिंदे ने बिना किसी स्वार्थ के इंसानियत दिखाई'
शाह ने आगे कहा, 'वहां हजारों अन्य मजदूर भी मौजूद थे। घुड़सवार, बोझ ढोने वाले और होटल कर्मचारी, सभी ने अपनी जान बचाई और भाग गए लेकिन आदिल ने वहां मौजूद लोगों के लिए अपनी जान दे दी।' आदिल के भाई सैयद नौशाद ने कहा कि उनके परिवार के लिए आदिल ही सबसे बड़ा सहारा थे। उन्होंने कहा, 'हमारा एकमात्र सहारा आदिल ही था। उसके जाने के बाद स्थानीय सरकार ने भी हमारी मदद की। हर एक नेता हमारे घर आया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का हमसे कोई संबंध नहीं था, फिर भी उन्होंने बिना किसी स्वार्थ के इंसानियत दिखाई।'